तुम्हारे जाने के बाद 

तुम्हारे जाने के बाद 

शाम में छत की मुंडेर पर पक्षियों का एक जोड़ा बैठा था।

लग तो वो बड़े प्यारे रहे थे।

मगर उन्हें देख मन में एक टीस उठ रही थी।

अब, जो तुम जा चुके हो हमेशा के लिए।

सब कुछ बिल्कुल नीरस सा है।

भले ही मैं उन सारी चीजों को शब्दों में पिरो कर 

इन कोरे पन्नों पर उकेरने की कोशिश करूं,

पर फिर भी, मैं असमर्थ हूं ,

ये बयां करने में की,

ये जो हवाएं चलती हैं ना, 

अब सुकून नहीं , 

हर पल तुम्हारे याद की थपकियां दे जाती हैं, 

वो हर्षृंगार का पेड़ , 

अब लगता है उसे भी तुम्हारी याद आती है , 

यूं ही खड़ा है वो , 

पहले जैसे फूलों की बारिश नहीं करता पास जाने पर,

तुम्हारे भेजे हुए वो खत,

मैं रोज पढ़ता हूं , रोज,

मैं चाहता नहीं उसे पढ़ना क्योंकि !

ख़ैर 

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….(मौन)…

तब भी मैं पढ़ता हूं।

मैं उन सभी चीजों को,

चाहे वो बेमाने ही क्यों न हों, 

पर अगर तुमसे जुड़ी हैं, 

मैंने संजो कर रखा हैं, 

जो तुम्हारे साथ रह कर मैंने नही किया ।

…( मौन)…

ऐसे अचानक भी कोई जाता है क्या?

मन करता है काश! उस समय मैं तुम्हारे पास होता,

एक आखिरी बार ही सही मैं तुम्हे रोकने की कोशिश करता , तुम्हारा हाथ थाम तुम्हे बताता की , 

“की याद आएगी तुम्हारी बहुत, 

और वो टीस मुझसे झेली नही जाएगी, 

एक बार बस मेरी खातिर रुक जाओ “

…(मौन)…

मगर मुझे पता है, 

तुम्हे रोकना मेरे बस में नहीं था। 

पर क्या पता वो आखिरी कोशिश हीं

….(मौन)….

तुम्हारे जाने के बाद 

मैं चुप बैठा एकटक आसमान को निहार रहा,

मैने आंसू पोछा, 

अंधेरा और ज्यादा हो चुका था।

वो पंछी भी अब जा चुके थे।

और, यहां मैं अकेला बैठा ढूंढ रहा था तुम्हे, 

कभी इन ठंडी हवाओं में,

उन चमकीले सितारों में और,ओम प्रकाश

हर्षृंगार के उन डालियों पर लगे बचे – खुचे फूलों में।

ओम प्रकाश

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तुम्हारे जाने के बाद 

3 thoughts on “तुम्हारे जाने के बाद ”

  1. आप इतने चुप क्यों रहते हैं, जबकि अपनी कलम से तो भरतनाट्यम बना देते हैं आप इतना अच्छा लिखते हैं…

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    • श्रद्धा जी… चुप वही रहता है जो या तो बहुत बोल चुका हो, या फिर बहुत झेल चुका हो। और अपने साथ दोनों स्थितियां हो चुकी है। वैसे भी मौन सबसे बेहतर जवाब होता है। हमारा लेखन आपके दिल तक पहुंचता है, ये हमारा खुशनसीब है। शुक्रिया जी प्रेम पहुंचें!

      Reply

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