अतीत भी हम हैं, और भविष्य भी हम, तो वर्तमान में उनसे बैर क्यों

अतीत भी हम हैं, और भविष्य भी हम, तो वर्तमान में उनसे बैर क्यों
अतीत भी हम हैं, और भविष्य भी हम, तो वर्तमान में उनसे बैर क्यों

एक जीवन में हमारे व्यक्तित्व की न जाने कितनी परतें बन जाती हैं, जो हमें खुद भी मालूम नहीं होती। बचपन बीता नादानी में, फिर जवानी में हमारे किरदार की असल परतें शुरू होती है, जो कि जीवन के हर मोड़ पर हमारे लिए फैसलों पर सवाल खड़े कर देती है।

अक्सर अपना जिया हुआ सोचकर उसे कभी-कभी बदलने का मन करता है, काश यूं ना होता तो यूं होता। इस काश के पीछे किसी भी फैसले के न जाने कितने ही अनछुए दूसरे पहलू जुड़े होते हैं, जो कि हमेशा घटने के बाद मन में आशंका छोड़ जाते हैं।

ऐसी आशंकाओं का क्या इलाज? क्या ऐसे विचारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा सकता है? इन्हीं सब विचारों के चलते जीवन बीत रहा है। मेरा व्यक्तित्व जिसकी परतें आए दिन खुल रही हैं और उसका अंदेशा कभी मुझे भी न था। इन परतों के खुलते जाने पर खुद को और नया महसूस कर रहा हूं। कभी-कभी लगता है इस तरह जीना भी कोई जीना है, क्या हम सबका जिया एक जैसा होता है? क्या इतनी परतें सबके व्यक्तित्व में होती हैं?

लोग कहते हैं ज्यादा सोच-विचार नहीं करना चाहिए, चीजों को आज के समय के हिसाब से जीना चाहिए। पर उस परत का क्या जिसमें मेरे जिए अतीत का हिस्सा आज भी कहीं अटका हुआ है, उस परत का क्या जिसमें भविष्य में लिए जाने वाले फैसलों की चिंता अपने पांव टेक कर बैठी है, और उस परत का क्या जहां से इन विचारों को एकदम उड़ेल कर खाली कर देने का विचार अपनी जगह घेर कर बैठा है?

कौन सी परत असली है, या सभी नकली है? बहुत सोचने के बाद एक सटीक तर्क देकर अपने आप को लिखने से यहीं रोक रहा हूं। तर्क ये दिया कि ये सभी परतें असली है, सभी भाव मेरे ही व्यक्तित्व के हैं। अतीत का कोई पछतावा कहो या भविष्य की चिंता, अपना जिया हुआ या जिया जाने वाला, सब समेट कर साथ लिए चलना होगा। जितनी परतें हैं सबको समय-समय पर अपने व्यक्तित्व में लाना होगा। क्योंकि ये परतें ही तो अब मेरे जीवन का मार्गदर्शन कर रही हैं, यदि इन्हें अपने जीवन से ठीक-ठीक पृथक कर दूं तो अपने व्यक्तित्व का आधार शून्य कर देने जैसा होगा।

अपने आप को कहीं नकली नहीं दिखा सकता । जीवन के हर मोड़ पर कोई नई परत खुलेगी और बस बाहें खोलकर उसका स्वागत करना होगा। स्कूल-कॉलेजों में मास्टर जी तुम्हें गणित के फार्मूले ज़रूर सिखाएंगे, पर अपने जीवन में अपने व्यक्तित्व की कौनसी परत कब धारण करनी है, इसका फार्मूला तुम्हें खुद ही सीखना पड़ेगा।

और सुनो, तुम भी ज्यादा सोचना मत। देखना समय-समय पर तुम्हें भी अपने व्यक्तित्व की कितनी परतें हैं, मालूम होता जाएगा। बस तुम भी इसे स्वीकार कर लेना।🥀

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